समय की गति
समय की गति में ही चिंतन का सार है
पर हमें कहा विश्राम है
तय है कुछ बदलेगा यहाँ समय की बस यही पुकार है
आरम्भ से अंत तक ठहराव कहीं नहीं होता
बस माया के इस चक्र का कभी विश्राम नहीं होता
पवन की वेग हो या नदियाँ का धार हो
अनवरत बहते रहना ही जीवन का सार है।
Written. By abhishek. Rai..
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