Tuesday, 9 August 2022

   समय  की गति 



समय  की  गति में ही चिंतन का सार  है 

पर हमें कहा विश्राम है 

तय  है  कुछ बदलेगा  यहाँ समय की  बस  यही पुकार  है 

आरम्भ से  अंत  तक ठहराव कहीं  नहीं  होता 

बस  माया के इस चक्र का कभी विश्राम  नहीं  होता 

पवन की वेग  हो  या नदियाँ का धार  हो 

अनवरत बहते  रहना  ही जीवन  का  सार   है।



Written. By abhishek. Rai.. 


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