भारत के अहसास भारत के किसान
अक्सर जब भारत की बात होती है तो किसानो का ज़िक्र ज़रूर होता है।भारतीय कृषि जहाँ भारत की अर्थव्यवस्था की धुरी है तो भारत के किसान इसके ध्वजा वाहक।बिना इनके भारत की अर्थव्यस्था की कल्पना तो एक बस सपने जैसा है ।सहस्त्रो सालों से चली आ रही कृषि विरासत को उसके उसी रूप में संजो के रखने का काम भारतीय किसानों ने बख़ूबी किया है लेकिन २१ सदी में नज़ारा कुछ अलग है ,भारत शायद पहले जैसा भारत नहीं रहा ऐसा मुझे लगता है क्योंकि अक्सर जब भी मै अपने गाँव से रूबरू होता हूँ ,तो मुझे वो खेती या किसानी को लेकर उत्साह नज़र नहीं आता।किसान बस खेती कर रहा है जीवन यापन के लिए इसका कारण ये भी है ग्रामीण अंचल में बहुत से लोगों के पास वो ज़रूरी कुशलता या योग्यता नहीं है जो शहरी अर्थव्यवस्था को चाहिए लेकिन इसके साथ दूसरा कारण भी जुड़ा जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसानों को और युवा वर्ग को खेती से दूर कर रहा है वो खेती में अनिश्चितता और सामाजिक ढाँचे में गिरता इसका मान और स्वाभिमान।
अक्सर हम ग्रीन रेवलूशन (green revolution) की बात करते है कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी को लेकर, पर क्या ग्रीन रेवलूशन कृषि को सामाजिक (सोशल) पिरमिड में ऊपर या सामान स्थान देने में सक्षम हो पाया या युवा वर्ग को उत्साहित कर पाया है कि वे स्वेच्छा से कृषि को चुने और वैज्ञानिक और प्राकृतिक पद्धतियों के समन्वय से अपना कार्य क्षेत्र कृषि को चुने।कृषि भारत निर्माण में तभी अपनी भूमिका दर्ज कर पाएगा जब युवा इसको मजबूरी नहीं बल्कि रोज़गार का सृजन करने वाला कार्यक्षेत्र मानकर अपनी ऊर्जा शक्ति को उच्चतम तकनीकी के सही प्रयोग से कृषि क्षेत्र में लगाए जिससे कृषि आत्मनिर्भरता के साथ देश की अर्थव्यवस्था के दूसरे कारकों जैसे औद्योगिग क्षेत्रों में अपना योगदान दे।
यह सवाल हम सभी के मन मस्तिष्क में होगा जो कृषि कार्य क्षेत्र से जुड़े है,लेकिन इसका समाधान भी हम सभी को ढूँढना होगा।मेरा सोचना यह है कि किसान जब ख़ुद को तकनीकी से जोड़ेगा तो वो सशक्त और आत्मनिर्भर के साथ समृद्ध भी होगा और विश्व पटल पर भारत अपनी पहचान एक आत्मनिर्भर भारत के रूप में रखेगा।
यदि कृषि उत्पाद हमारे पौष्टिक और पर्याप्त हुए तो हमारी वर्तमान बौधिक क्षमता और युवा कार्य बल ऊर्जावान और स्वस्थ होगा।क्योंकि कृषि पोषण का आधार है यदि ये विस्तृत रूप से सुदृढ़ और सतत् विकास के माप दंडो के हिसाब से क्रियान्वित हो,तभी कृषि भारत के हरेक क्षेत्र में प्रगति की आधारशिला होगी चाहे वो औद्योगिग ,वैज्ञानिक या आर्थिक या सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण कोई भी विषय हो।
अतः भारत के अहसास किसानों को महसूस करिए और अपना क़दम कृषि को ओर बढ़ाए और भारतीय कृषि को नवीनतम ऊँचाइयों पर ले जाए।।
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