Saturday, 12 November 2022

 

सोच में हाज़िर

आकाश में घना कोहरा है,
कुछ अजीब बात है ना,
ठंड भी नहीं है,
पर ये कोहरा है,
सड़क पर भीड़ खड़ी है,
बेवजह,
किसी ने पूछा क्यों क्या हुआ?
पर, कोई कुछ बोलता नहीं,
सभी बुत की तरह खड़े हैं,

तभी एक छोटा सा लड़का बोलता है,
डरे है सब, किसी अनजान खतरे से,
कोई अपने अतीत से, तो कोई अपने भविष्य से,
इनकी सोच में कोई हाज़िर हो गया है,
जिसका तिलिस्म ये तोड़ नहीं पा  रहे है,
बस कोई सकारात्मक  सोच, जो हाज़िर हुई सोच से लड़ सके तभी कुछ होगा,
नहीं तो,
ये हाज़िर हुई सोच इनके रूह को खत्म कर देगी,
सोच और विचारों का द्वंद् तो सदियों से चला आ रहा है,
जीता वही जो परिवर्तन के साथ रहा,
सुदृढ़ रहा, निर्भय रहा,
और मन के दरवाजे कैद करने वाली सोच के लिए बंद,
और मुक्त करने वाली सोच के लिए खोल दिये,
जैसे आकाश बाहें फैलाये वर्षा को अपनाता है,
और घने कोहरे को हटाता है.

                  By. अभिषेक राय

https://youtu.be/-sUn9TpFFsw

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